Naimisharanya नैमिषारण्य

नैमिषारण्य 88000 ऋषि मुनियों की तपस्थली है जहां पर ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्ष तपस्या वा साधना की है यहां का प्रमुख स्थान चक्रतीर्थ है जिसकी उत्पत्ति ब्रह्मा जी के द्वारा छोड़े गए चक्र से हुई है एक बार 88000 ऋषि-मुनियों ने ब्रह्माजी से कहा भगवन हमें वह स्थान बताएं जहां पर कलयुग में थोड़े समय में पूजन अर्चन जप यज्ञ तप आदि धार्मिक अनुष्ठान करने से सिद्धियों की प्राप्ति हो व हमें कोई दानव दैत्य न सताये और जहां पर कलि का प्रवेश निषेध हो । तब ब्रह्मा जी ने अपने मन से एक चक्र का निर्माण किया और कहा यह जहां पर जाके रुकेगा वही सबसे पुनीत स्थान होगा ब्रह्मा जी द्वारा छोड़े गए चक्र के नेमि (मध्यम भाग) या शक्ति जिस आरणय (जंगल) में गिरी उसका नाम नैमिषारण्य पड़ा इससे नैमिष नैमिषारण्य नीमसार आदि नामों से जाना जाता है

प्रमुख स्थल

1 चक्रतीर्थ:

ब्रह्मा जी के द्वारा छोड़ा गया चक्र जिस स्थान पर गिरा वह स्थान चक्रतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर एक कुंड है जहां पर स्नान मार्जन करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति होती है। ये यहां का सबसे प्रमुख स्थान है

२ ललिता देवी :

यहां पर माता सती के हृदय का एक भाग गिरा है  । शास्त्रों में जिसे लिंगधारिणी के नाम से जाना जाता है लेकिन प्रेम और कंगना के कारण यह ललिता देवी के नाम से प्रसिद्ध है । तंत्रशास्त्र में  इसे उड्डियन पीठ के नाम से जाना जाता है।

३ स्वयंभू मनु सत्तरूपा तपस्थली:

इस स्थान पर सृष्टि के प्रथम पुरुष मनु महाराज व महारानी सत्तरूपा जी ने 23000 वर्ष तपस्या किया है और भगवान को पुत्र रूप में पाने का वरदान प्राप्त किया जिसके कारण भगवान राम का जन्म हुआ।

4 व्यास गद्दी :

यहां पर महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों का विभाजन किया और पुराणों में संशोधन किया व अपने शिष्यों को वेदों व पुराण एवं शास्त्रों का ज्ञान  दीया ।

5 सूत गद्दी:

यहां पर सूत जी ने शौनकादि ऋषियों को पुराणों का उपदेश दिया।

6 हनुमानगढ़ी व पांडव किला:

यहां पर अहिरावण का वध करने के बाद हनुमान जी राम लक्ष्मण सहित प्रगट हुए थे और यहीं पर पांडवों ने 12 वर्ष तपस्या किया है।

7 दधिचि कुंड:

 यहां पर महर्षि  दधीचि ने अपनी अस्थियों का दान दिया था और उनके लिए समस्त तीर्थों को विष्णु जी ने बुलाया था समस्त तीर्थों के जल से स्नान  दधीचि जी ने किया था  इसीलिए इसे दधिचि कुंड कहते है। क्योंकि जब समस्त तीर्थों का जल आपस में मिल गया तो इसे मिश्रित तीर्थ के नाम से पुकारा गया।

इसके अतिरिक्त राम जानकी मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव, रुद्रवर्त, हत्याहरण ,नैमिष नाथ देवराज  अहोबिलमठ, बालाजी मंदिर, कालीपीठ ,त्रिशक्ति धाम ,देवपुरी आदि दर्शनीय स्थान है

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